रविवार, 19 मार्च 2023

रिश्तों के मायने

19 Mar 2023 · 3 min read

रिश्तों के मायने


एक ही मां की कोख में पले।
 एक ही पिता की उंगुली पकड़कर चलें।

 एक ही आसमा के तले  धरती पर कदम रख  मां के सानिध्य में ढले।

 एक ही आंगन में

 ममता की छाव तले, पले भी, रोए भी,रात में संग सोए भी।

फिर मेहनत की अपार तोड़ी सभी बंधनों की दीवार।
 पैसों को बनाया जीवन का आधार ।
पार लगाई नईया स्वयं होकर सवार।

आगे तो पहुंच गए पर पीछे छूट गया परिवार।
जिसमें एक छोटा भाई था जिसके लिए उसका बड़ा था।
 उसके जीवन का आधार
वह न कर पाया अपने सपने साकार ।
ना बना पाया वह पैसों को अपने जीवन का आधार।

ना तोड़ पाया संघर्ष की दीवारों को, नहीं बदल पाया अपने विचारों को।

जब पैसा  बढ़ा बड़े भाई में घमंड  हुआ अपार 
बहन ने भी माना,  बड़े भाई ने  किए है। अनेक उपकार।

 रिश्तेदारी निभाता है सभी जगह दौड़ा चला आता है ।
क्या हुआ यदि वह अपने छोटे भाई  के परिवार को नहीं चाहता है ?
घर के मुहूर्त का न्योता सब तरफ जाता है।
पर छोटे भाई का परिवार नहीं बुलाया जाता है।
बहन कुछ कह नहीं सकती शायद वह पैसे वाले भाई के बिना रह नहीं सकती।

देखो दुनिया का दस्तूर है।
 दोगलापन निभाया जाता है।
 व्हाट्सएप पर बड़े भाई का छोटे भाई के परिवार से प्यार दिखाया जाता है।
असल जीवन में रिश्ता नहीं निभाया जाता है।

यह मेरी कहानी नहीं
अब खून में रवानी नहीं।
होता आया है होता रहेगा अमीर भाई - बहन के द्वारा गरीब भाई- बहन पर अत्याचार।
मुझे समझ नहीं आता 
जब चढ़ता है अमीरी का बुखार।
तब कहां जाते हैं मां - बाप के दिए संस्कार।
क्यों अपने ही रिश्ते बली चढ़ाए जाते हैं।
झूठी शान की खातिर 
अपनों के, अपने  ही  रिश्तेदारों में समक्ष सिर झुकाए जाते हैं।

क्या यही सब देखने की खातिर, 
सरकार द्वारा हम दो हमारे दो के नारे लगवाए जाते हैं।

कविता का सार 
भाड़ में गया परिवार
यदि पैसा है तो हम हैं समझदार।


कविता पढ़ने के बाद और रिश्ते टूट जाएंगे क्योंकि हमसे और भी बहुत से रूठ जाएंगे।


यह मेरी कहानी नहीं
अब खून में रवानी नहीं।
होता आया है होता रहेगा अमीर भाई - बहन के द्वारा गरीब भाई- बहन पर अत्याचार।
मुझे समझ नहीं आता 
जब चढ़ता है अमीरी का बुखार।
तब कहां जाते हैं मां - बाप के दिए संस्कार।
क्यों अपने ही रिश्ते बली चढ़ाए जाते हैं।
झूठी शान की खातिर 
अपनों के, अपने  ही  रिश्तेदारों में समक्ष सिर झुकाए जाते हैं।

क्या यही सब देखने की खातिर, 
सरकार द्वारा हम दो हमारे दो के नारे लगवाए जाते हैं।

कविता का सार 
भाड़ में गया परिवार
यदि पैसा है तो हम हैं समझदार।

आभार सहित
रजनी कपूर

Language: Hindi
 

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