रविवार, 21 फ़रवरी 2021

परमात्मा से अरदास


परमात्मा से अरदास  

यह तन भी तेरा,यह मन भी तेरा 

यह सृष्टि,प्रकृति,नदियाँ,सूरज 

चाँद,तारे,तमस सभी कुछ तेरा।।

जीवन भी तेरा,मरण भी तेरा 

तेरे होते हे परमात्मा !

 क्यों हैं ??

इस विश्व में हैं सघन अन्धेरा,

विश्वास,करुणा,ममता,दया 

परोपकार,उदारता,विशालता

सभी तेरे लक्षण, 

ये सभी मनुष्य के मार्गदर्शक। 

 ये वर्षा,ये उमस,ये सर्दी,कंपकपाहट, गर्मी 

की गर्माहट, ये उमंग,ये उल्लास भी तेरा

     तो भगवन ! फिर भी क्यों 

      छाया है इस धरती पर

घोर अन्धेरा,

 मुक्त कर लोगों को इस रजनी से 

ज्योति जगा दे आस की 

क्योंकि मनुष्य की आत्मा में निवास भी तेरा 

छुड़ा दे इस आत्मा को भयंकर कहर से

क्योंकि सुख भी तेरा, दुख भी  !!


 

   रिश्तों की मर्यादा


 












   प्यार का रंग रंगीला

   ना  फीका, ना सजीला

 

हर  रिश्ते की होती है अपनी मर्यादा,

 हर कोई करता है अपने आप से सच्चा रिश्ता निभाने का वादा।

 पर क्या सोचा है, क्यों होती है, हर रिश्ते की मर्यादा ?

खूबसूरत, पवित्र धागे से बंधा होता है, इतना नाजुक होता है कि जरा सी चोट लग जाए तो टूट जाता है प्रेम रूपी धागा।

सदा रिश्तों में मिठास घोले,

अपनों से बड़ों से सदा प्रेम से बोले,

झुककर करें सदा प्रणाम

ना हो कभी ऐसा कि बच्चे करें विश्राम और बड़े करें तुम्हारे सभी काम 


संग सभी के हँसकर बोलो,

मन-मस्तिष्क में अमृत घोलो।

खुद को भी मिलेगा आराम ।

 हर रिश्ते को न तराजू से  तोलो ।

 बोलने से पहले जरा, सम्भल कर बोलो।

 रखो सब का ख्याल,

जी हाँ , रखो सब का ख्याल,

 पर जब हो आप का सवाल तो ,

ना मचाए  कोई रिश्ता  आकर उसमें  बवाल..........

सुना है तलवार का जख़्म बहुत गहरा होता  है, पर समय के साथ घाव भर जाता है।

जुबान की खट्टास से हर रिश्ता, समय से पहले ही  ढ़ल जाता है।

पत्नी जब मायके से आती है।

 तब वह पिया संग हर रीत निभाती  है , उसकी खातिर अपना पूरा संसार पीछे छोड़ आती है।

वे अपनी हर खुशी, हर ख्वाब की पूर्ति करना ससुराल में ही चाहती है।

क्यों ना ? ब्याहकर बहू नहीं,  बेटी ही ले जाई  जाए।

 रिश्ते की मर्यादा दोनों ही तरफ से निभाई जाए।

 रिश्तों  में सदा उतार-चढ़ाव आते हैं पर ..

कुछ लोग उस वक्त  रिश्ते कटु वचन सुना कर ही निभाते हैं।

 

कुछ रिश्ते ऊपर से तो अपनापन  दिखलाते  हैं पर…..

 भीतर से साँप से भी अधिक जहर उगल जाते हैं।

बिरादरी के सामने सभी अपने मधुर संबंध दिखलाते हैं  पर

 मेहमानों  के जाते ही सभी रिश्ते अपने -अपने कमरों तक  सिमट जाते हैं ।

हम आज आप को इतिहास में ले जाते हैं और बीते समय के लोगों द्वारा निभाई गई रिश्तों की मर्यादा सुनाते हैं।

साथ ही साथ अतीत और वर्तमान के रिश्तों में  फर्क भी दिखलाते  हैं ।

 रिश्ता निभाए भरत जैसा,

जिनके लिए प्रेम से बड़ा नहीं था पैसा।।

 आजकल अखबारों  में अक्सर ऐसे किस्से आते हैं  कि चंद पैसों की खातिर भाई ही भाई का गला दबाते हैं ।

 

सावित्री ने  ऐसा पतिधर्म निभाया कि यमराज ने भी उसकी तपस्या के समक्ष उसका पति लौटाया।

कुछ पति हो या  पत्नी अपने स्वार्थ की खातिर एक घर होते हुए भी दूसरा घर बसाते है,  अपने परिवार को धोखा देकर नया आशियाना बसाते हैं ।

 

स्वामी विवेकानंद जी ने ऐसे बेटे की भूमिका  निभाई ।

जग को सहनशीलता,परोपकार, प्रेम, दया, भ्रातृत्‍व  प्रेम की सीख हैं  पढ़ाई ।

 

पर आजकल तो  माता -पिता  या तो अलग घर में जीवन बिताते है या फिर

अनेकों के माता-पिता वृद्धआश्रम में पाए जाते है ।

 

 माँ सती ने पति के अनादर की ऐसी गाथा सुनाई।

 खुद भस्म  होकर पति  के सम्मान की महिमा बढ़ाई।

 

आजकल तो हर जगह  चलती है, हर रिश्ते की बुराई।

क्या कभी सोचा है कि हमारे  इन  रिश्तों  में इतनी दूरी कैसे  आई?

 

क्योंकि हमने सब में गलतियाँ  ही पाई ।

ना ढूंढी कभी किसी रिश्ते में अच्छाई।

 

रिश्तों  की मर्यादा हम सब से शुरू होती हैं ।

यदि हम करेंगे भलाई तो लौट कर भी आएगी अच्छाई।

 

सधन्यवाद

रजनी कपूर

रविवार, 14 फ़रवरी 2021

मास्टर शेफ़ प्रतियोगिता

 एटीएस  वैली स्कूल के बच्चों ने आज खाना बनाकर क्या गजब हैं ढाया 👌🏻👌🏻👌🏻

बिना गैस, एक्सटेंशन, कुकर,मिक्सर  का इस्तेमाल किए 15 मिनट में है पकवान बनाया।


ऑनलाइन कंपटीशन में भी बच्चों ने हैं अपना हुनर दिखलाया।


आज सभी बच्चों का हुनर देख अध्यापकों का भी मन मुस्काया ।

बच्चों ने दूध में  पपीता, अनानास, चेरी,बादाम,चॉकलेट मिलाकर उसको भी बड़ा  मस्त बनाया।

किसी ने सैंडविच पर स्माइली,तो किसी ने  चेहरा बनाया।

किसी ने उसे पत्ते सी प्लेट पर सजाया।

किसी ने ब्रेड से केक तो किसी ने चमचम बनाया ।

किसी की ब्रेड पर अँगूर तो किसी की ब्रेड पर  सेब शरमाया।

नारियल के सिर आज मास्टर शेफ़ का ताज है आया ।


बुधवार, 10 फ़रवरी 2021

दीये का अभिमान

 दीये का गरूर भी देखो।

जिस अंधेरे  से  पहचान  है, उसकी

जिस तमस में बसती  जान  है ,उसकी

कहता है , मेरी दुश्मनी तो अंधेरों से हैं।

 तो छोड़ अंधेरे को ••••2

सूरज की रोशनी में चमक कर तो दिखलाए।

अपनी चमचमाती लौ सूरज की  रोशनी में भी तो फैलाए।

क्यों निभाता है दुश्मनी अंधेरे से•••

कभी प्रेम भी जतलाए।

क्यों खफ़ा है, तमस से !!  कभी वफ़ादारी भी तो दिखलाए । 

अन्धेरा दीपक के पीछे बदनाम है।

 पत्ता नहीं !! उसे हवाओं से क्या काम है।

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

माँ का आशीर्वाद

 मातृत्व सुख सबसे पहले तुम्हें देख कर मैंने पाया !! इतना खूबसूरत बेटा, देख  मेरा मन फूला नहीं समाया!!

 मुझे भी अपनी खूबसूरती पर उस दिन

नाज आया !!

तुझे आशीर्वाद देने पूरा दादका,नानका परिवार आया !!

बड़े प्यार से आयुष जीजा जी ने नाम लक्ष्य  बतलाया !!

जिंदगी में सदा मुस्कुराना !!

सर झुकाकर सदा बड़ों का आशीर्वाद पाना !!

 भूले से भी कभी किसी का दिल न दुखाना !!

प्रेम का रिश्ता हर किसी से निभाना !!

जिंदगी में जब भी मौका मिले तो सबसे पहले इंसानियत का फर्ज निभाना !!

हर वर्ष धूमधाम से अपना जन्मदिन मनाना !!

समझदारी से मिला धोखा

   जिसको मैंने जीवनपथ का गुरु     मान,  आधार बनाया। जिसकी शिक्षा और मार्गदर्शन ने था; नया रास्ता दिखलाया। जिसकी  लग्न व ईमानदारी को था; मैंन...