शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

अरे वाह !! क्या जमाना आया है।




                                               मनोरंजक कविता




अरे वाह !! क्या जमाना आया है।

हर किसी ने मास्क से अपना मुँह छिपाया है।

अब यदि परिचितजन भी साथ में खड़ा हो फिर भी कौन किसे पहचान पाया है?

 भई वाह!! क्या जमाना आया है।

 लड़कियों को सजना- सँवरना, सूट की मैचिंग की बिंदी लगाना, यही सब लुभाता था ।

अब तो शर्ट के साथ मैचिंग मास्क पर सज्जनों ने भी अपना हक जमाया है ।

अरे वाह !! क्या जमाना आया है।

 जिन लड़कियों ने मुँह पर दुपट्टा पहन,

 लड़कों को सताया था,     

उन्होंने भी मास्क लगा उनको सही सबक सिखाया है।

 मुँह दिखलाई की रस्म तो हमने सुनी थी,

 पर अब मुँह छिपाई का जमाना आया है।

तभी तो सभी ने मुँह पर मास्क लगाया है।

 भई वाह!! क्या जमाना आया है।

 पहले गंगाजल से पाप धुलवाए जाते थे,

 अब हर कर्म करने से पहले सैनिटाइजर लगवाया जाता है ।

अब तो हर वस्तु को सैनिटाइजर से नहलाया जाता है,

 बाद में उसे  उपयोग में लाया जाता है।

पहले लोग राशन लाकर जल्दी से छिपाते थे, 

अब राशन को भी घर के किसी कोने में 3 दिन तक कैद कराया जाता है।

 भई वाह!! क्या जमाना आया है।

 घर में सामान बाद में आता है,

 पहले उसे धूप में रखवाया जाता है ।

 भई वाह !!क्या जमाना आया है।

मांग में लगे सिंदूर को गर्मी में नहाते देखा था.......

 कभी माथे ,कभी नाक पर बहते देखा था।

अब तो मास्क के नीचे लगी लिपस्टिक पसीने संग क्या धूम मचाती है,

 मास्क हटाओ, वह होठों पर कम ठोड़ी पर अधिक  नजर आती है।   

 भई वाह !! क्या जमाना आया है।

 बर्तनों संग लिफाफे भी धोये जाते हैं ।

सब्जियों को भी हम गर्म पानी से नहलाते हैं।                

   पहले ट्रक के पीछे लिखा होता था:-

                                                          बुरी नजर वाले तेरा मुँह काला

                                              अब तो हमने वह पढ़ने से पहले ही अपना  मुँह  छिपा डाला।                             

पहले शराब बिकती थी मयखानों में ,

अब मिलती है सब दुकानों में,

 कुछ कहते थे पूरा जीवन शराब कभी हाथ नहीं लगाई,

 अब वही जनाब, बड़ी शिद्दत से सैनिटाइजर से करते हैं हाथों की धुलवाई।                     

पहले बड़े चाव से गहने बनवाए जाते थे।

अब थोड़े लंबे, तीखे, रंग-बिरंगे मास्क  बनवाए  जाते हैं।

 पहले बड़ों से पर्दा रखने की  रस्म निभाई जाती थी,

 अब फ़ेसमास्क वही रस्म निभाते  हैं ।

 सभी को सुरक्षित रखने की खातिर हम फ़ेसमास्क  लगाते हैं।

अरे वाह !!क्या जमाना आया है। 

हर किसी ने मास्क से अपना मुँह छिपाया है। 

सधन्यवाद   

 रजनी कपूर


2 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे आपकी कविता बहुत पसंद आयी | आपने अपनी भावनाओं को शब्दों के रूप में इस कविता में बहुत ही अच्छे ढंग से पिरोया है |आपकी और भी ढेर सारी कविताएँ पढ़ने के लिए मैं बहुत उत्सुक हूँ |

    जवाब देंहटाएं

यदि आपको कविताएँ अच्छी लगी तो कृप्या इनको लाइक करें । कविता पढ़ने के लिए आपका आभार

समझदारी से मिला धोखा

   जिसको मैंने जीवनपथ का गुरु     मान,  आधार बनाया। जिसकी शिक्षा और मार्गदर्शन ने था; नया रास्ता दिखलाया। जिसकी  लग्न व ईमानदारी को था; मैंन...