शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

पाठकों को समर्पित

                                                              पाठकों को समर्पित 

                                 इस रात्रि को प्रकाश चाहिए।

                     जीवन को जीने की आस चाहिए ।

       अधिक ना भी मिले तो इतना तो सही की दीपक का प्रकाश  चाहिए।

  ज्ञान के सागर में से  कुछ ज्यादा नहीं तो थोड़ा सा जीने  का अंदाज चाहिए।

 आपकी चरण कमलों की रज से जीवन में सफलता का विश्वास चाहिए।



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