सोमवार, 12 जून 2023

समझदारी से मिला धोखा

  जिसको मैंने जीवनपथ का गुरु     मान, आधार बनाया।

जिसकी शिक्षा और मार्गदर्शन ने था; नया रास्ता दिखलाया।

जिसकी  लग्न व ईमानदारी को था; मैंने अपनाया।

जिसकी दृढ इच्छा शक्ति , स्वाभिमान का गुण; था मुझको  बड़ा भाया।


भावनाओं में बहकर जिसको कभी था; मैंने दिल से अपनाया।

 

जिस्मों को छूआ नहीं ; तन कभी उसका हुआ नहीं।

क्योंकि यह आखों से जतलाया जाता हैं; सच्चे प्यार  पर कहां हक दिखलाया जाता है। 

 मन ही मन था उसको  निहारा, 

मगर जब उसकी नजरों ने किया किसी ओर को इशारा।


 मन से उसने था हमको तिस्कारा , हमने तब भी खुद ही खुद को दिया  था सहारा।


आज मेरे दिल से निकली ये बात; उसके दिल तक जाएगी।

दूरियां भी यदि हैं तो ये मेरे आहें हवाओं संग बह; उसको  झिंजोर कर आएगी।

 मेरी  यह कविता उसके मानस पटल पर एक ऐसी छाप छोड़ आएगी।

उसको कुछ रातों तक नींद भी न आएगी।

उनके कर्मों के  रोड़े,  जब मेरे प्रारब्ध में  बाधा बन जाएंगे।

जब आपनी नाइंसाफी की सफाई वो दे नहीं पाएंगे।

 तब खुद की गलती पर वो आज जरूर पछतायगे।

आज वो मुझे याद करने पर मजबूर हो जाएंगे।

आज गुनाह की माफ़ी मुझसे नहीं ; खुदा से मांगने जाएंगे।

 सधन्यवाद 

रजनी कपूर

रविवार, 19 मार्च 2023

रिश्तों के मायने

19 Mar 2023 · 3 min read

रिश्तों के मायने


एक ही मां की कोख में पले।
 एक ही पिता की उंगुली पकड़कर चलें।

 एक ही आसमा के तले  धरती पर कदम रख  मां के सानिध्य में ढले।

 एक ही आंगन में

 ममता की छाव तले, पले भी, रोए भी,रात में संग सोए भी।

फिर मेहनत की अपार तोड़ी सभी बंधनों की दीवार।
 पैसों को बनाया जीवन का आधार ।
पार लगाई नईया स्वयं होकर सवार।

आगे तो पहुंच गए पर पीछे छूट गया परिवार।
जिसमें एक छोटा भाई था जिसके लिए उसका बड़ा था।
 उसके जीवन का आधार
वह न कर पाया अपने सपने साकार ।
ना बना पाया वह पैसों को अपने जीवन का आधार।

ना तोड़ पाया संघर्ष की दीवारों को, नहीं बदल पाया अपने विचारों को।

जब पैसा  बढ़ा बड़े भाई में घमंड  हुआ अपार 
बहन ने भी माना,  बड़े भाई ने  किए है। अनेक उपकार।

 रिश्तेदारी निभाता है सभी जगह दौड़ा चला आता है ।
क्या हुआ यदि वह अपने छोटे भाई  के परिवार को नहीं चाहता है ?
घर के मुहूर्त का न्योता सब तरफ जाता है।
पर छोटे भाई का परिवार नहीं बुलाया जाता है।
बहन कुछ कह नहीं सकती शायद वह पैसे वाले भाई के बिना रह नहीं सकती।

देखो दुनिया का दस्तूर है।
 दोगलापन निभाया जाता है।
 व्हाट्सएप पर बड़े भाई का छोटे भाई के परिवार से प्यार दिखाया जाता है।
असल जीवन में रिश्ता नहीं निभाया जाता है।

यह मेरी कहानी नहीं
अब खून में रवानी नहीं।
होता आया है होता रहेगा अमीर भाई - बहन के द्वारा गरीब भाई- बहन पर अत्याचार।
मुझे समझ नहीं आता 
जब चढ़ता है अमीरी का बुखार।
तब कहां जाते हैं मां - बाप के दिए संस्कार।
क्यों अपने ही रिश्ते बली चढ़ाए जाते हैं।
झूठी शान की खातिर 
अपनों के, अपने  ही  रिश्तेदारों में समक्ष सिर झुकाए जाते हैं।

क्या यही सब देखने की खातिर, 
सरकार द्वारा हम दो हमारे दो के नारे लगवाए जाते हैं।

कविता का सार 
भाड़ में गया परिवार
यदि पैसा है तो हम हैं समझदार।


कविता पढ़ने के बाद और रिश्ते टूट जाएंगे क्योंकि हमसे और भी बहुत से रूठ जाएंगे।


यह मेरी कहानी नहीं
अब खून में रवानी नहीं।
होता आया है होता रहेगा अमीर भाई - बहन के द्वारा गरीब भाई- बहन पर अत्याचार।
मुझे समझ नहीं आता 
जब चढ़ता है अमीरी का बुखार।
तब कहां जाते हैं मां - बाप के दिए संस्कार।
क्यों अपने ही रिश्ते बली चढ़ाए जाते हैं।
झूठी शान की खातिर 
अपनों के, अपने  ही  रिश्तेदारों में समक्ष सिर झुकाए जाते हैं।

क्या यही सब देखने की खातिर, 
सरकार द्वारा हम दो हमारे दो के नारे लगवाए जाते हैं।

कविता का सार 
भाड़ में गया परिवार
यदि पैसा है तो हम हैं समझदार।

आभार सहित
रजनी कपूर

Language: Hindi
 

रविवार, 29 जनवरी 2023

24 जनवरी अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस

बेटी आएगी, तो खुशियां लाएगी।


इस बार बेटा होने पर की जानी वाली सारी रस्में, बेटी होने पर भी निभाई जाएगी।


जी हां सही, सुना आपने बेटी होने पर भी वही रस्में निभाई जाएगी जिन पर जन्मसिद्ध अधिकार सदियों से बेटों का था;

 वह अधिकार हर बेटी भी पाएगी।


जब बेटी पढ़ाई जाएगी तो वह गर्वसहित हमारी शिक्षा,सभ्यता,संस्कृति और संस्कार को आगे ले जाएगी।


अब से बेटी अबला नहीं,सबला बन उभर पाएंगी।


बेटियां चूल्हों,आग और तेज़ाब से नहीं सताई जाएगी।


क्योंकि बेटी पढ़ाई जाएगी।

अब बेटी कम उम्र में नहीं ब्याही जाएगी,

अब बेटी केवल घर ही नहीं चलाएगी वह ट्रेन, मेट्रो,हवाई जहाज तो लड़ाकू जहाज भी चलाएगी


  वह सेना में दुश्मनों से भी लड़ने जाएगी।

अब बेटी न कोख में, न भूख से,न उत्पीड़न से मारी जाएगी।


अब बेटी स्कूल , दफ्तर ही नहीं।


 राष्ट्रपति बन दुनिया को अपनी धाक दिखाएगी।


अब बेटी धरती का वरदान बन घर-घर पूजी जाएगी।

 इस अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर हर बेटी का कहना यही है।

अभी समय हमारा है।भविष्य भी हमारा है,उस पर अधिकार भी  हमारा है।

संपूर्ण समर्पण

माना बदलाव जरूरी है।

 परिवर्तन स्वभाविक है।

पर हमारे लगाव का  क्या ?

  जो होगा आप से उस अलगाव का क्या ?

क्या खोया, कैसे गिनवा पाएंगे ?

हीरे से अनमोल रत्नों के, प्रेम से वंचित रह जाएंगे।

अब कौन हेलमेट न पहनने पर, हमें सबक सिखाएगा ?

स्कूल के मुख्य द्वार पर खड़े रहकर, कौन फूलों सा मुस्काएगा।


भारत का मान बढ़ना है; बच्चों को भी भारतीय होने पर गर्व करना सिखलाना है।


अब कौन बच्चों से पहले,अध्यापकों को  भी आभार व्यक्त करना 

सिखलाएगा ?


एक- दो अध्यापकों की सेहत जरा सी ख़राब हो जाने पर स्कूल में  कौन योग कक्षाएं लगवाएगा।


अब कौन हमारी तीन अच्छी बातें पढ़कर स्माइली कॉपी पर बनाएगा।


अब कौन इन कच्ची मिट्टी के मटकों को, हल्के हाथों की थाप देकर सुदृढ़,सक्षम और कमाऊ बनाएगा।


जितना आदरणीय अपराजिता मेम और   आदरणीय संदीप सर ने हमें सिखलाया है।

अब कौन हमें सिखलाएगा।

जब स्कूल में आपके ऑफिस से बाहर से आते - जाते याद आओगे आप..............


तो कौन हमें अब दिलासा देकर  समझाएगा

बुधवार, 26 जनवरी 2022

                                                 हमारा फ़र्ज


 दूसरे देशों की सभ्यता, संस्कृति और रीति-रिवाज़ों को हम बड़ी शिद्दत से चाहते हैं;

लेकिन हम अपने ही घरों में अपने बड़े- बुजुर्गों के द्वारा दिए 

संस्कारों को भूल जाते हैं;

 इसलिए तो हम आजकल साड़ी और कुर्ते-पजामे में नहीं, विदेशी कपड़ों में अधिक नज़र आते हैं।

हमारी पारंपरिक वेशभूषा को विदेशी लोग क्यों इतना चाहते हैं;

 क्योंकि हम आज भी उनमें बहुत खूबसूरत नज़र आते हैं।


 पर अफ़सोस हम तो मॉडर्न बनना चाहते हैं।

इसलिए तो आजकल हम रिश्ते घरों में जाकर नहीं,

 सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर निभाते हैं।


 सोचे ! क्या हम भारतीय होने का फर्ज़ निभाते हैं ?


क्या हम सड़क सुरक्षा नियमों का पालन नियमित रूप से कर पाते हैं ?


 कभी हम गाड़ी गलत दिशा में चलाते है;

 तो कभी जल्दी में स्पीड लिमिट भूल जाते हैं।

 आधे काम तो हम गाड़ी में फोन पर बात करते हुए ही निपटाते हैं।


 यहां तक कि हम  हेलमेट खुद की सुरक्षा के लिए कम अपितु ट्रैफिक पुलिस से

बचने के लिए लगाते हैं।

 इसलिए तो हम सस्ते हेलमेट से काम चलाते हैं,अच्छा हेलमेट न खरीद हम पैसे बचाते हैं।


 पर  ! क्या पता हैं आपको,

 भारत में हर वर्ष लाखों लोग सड़क हादसों के शिकार हो जाते हैं।

 छोटी- सी लापरवाही से न जाने कितने घर बिखर जाते हैं।


 सोचे ! क्या हम भारतीय होने का फर्ज़ निभाते हैं ?

 हम तीनों राष्ट्रीय त्योहारों पर तीन रंग में रंगे कभी फेसबुक, कभी इंस्टाग्राम तो कभी ट्‍विटर पर नज़र आते हैं।


 सड़कों के किनारों पर स्वच्छ भारत के पोस्टर बनाए जाते हैं।

 पर अफ़सोस उन्हीं सड़कों पर गाड़ियों व बसों से खाली रैपर बाहर गिराए जाते हैं।

 सोचे ! क्या हम भारतीय होने का फर्ज़ निभाते हैं ? 

 मेरी कविता को पढ़ने के बाद मनन कीजिएगा और फिर यह बताइएगा कि क्या आप

 भारतीय होने का फर्ज़ निभाते हैं?

  यदि हां,तो आप सच्चे अर्थों में भारतीय कहलाते हैं।

 

  चलो! मिलकर कदम बढ़ाते हैं।

  आज गणतंत्र दिवस  के अवसर पर भारत को आगे बढ़ाने की कसम खाते हैं।

 

 आभार सहित

 रजनी कपूर


बुधवार, 19 मई 2021

शिवरात्रि का उपहार

 शिवरात्रि का उपहार

 गौरवान्वित हुआ गौरव हमारा

 उसके अंगना में खिला कुसुम प्यारा

 प्रभु ने भेजा उपहार न्यारा

 शिवरात्रि पर आया नन्हा सा माँ-बाप की आँखों का तारा

 बेटी घर सुख लेकर आई

 समस्त परिजन को हो गुनाक्षी के आने की बधाई

 प्रभु नन्ही परी  को दिन-प्रतिदिन  बढ़ाना  चिंता,आपदा दूर भगाना 

गुनाक्षी पर अपना आशीर्वाद बरसाना ।।

फूलों सा मन मुस्काया !! ( धन्यवाद )

फूलों सा मन मुस्काया !!

जब मैंने आपको पाया

 दया,करुणा,सहनशीलता इन पर हक केवल नारी का है ।

मुझे तो बचपन से यही सिखलाया।

पर आपसे मिलकर पुरुषों में भी यह स्वरूप होता है समझ में आया ।

मोतियों सी लिखाई और गजब का दिमाग है,आपने पाया ।

 चालाकों की दुनिया में भी जिन्दा है शराफत  ;

 यह भी आपमें नजर आया।

सदा रहे आशीर्वाद  आपका

 मन को भी आपका साथ बहुत भाया 

माना कि आज थोड़ा सा संकट आया !!

छट जाएंगे चिंता के बादल क्योंकि हर रात के बाद सूरज आया !!

धन्यवाद

Rajni Kapoor

समझदारी से मिला धोखा

   जिसको मैंने जीवनपथ का गुरु     मान,  आधार बनाया। जिसकी शिक्षा और मार्गदर्शन ने था; नया रास्ता दिखलाया। जिसकी  लग्न व ईमानदारी को था; मैंन...