दोस्ती
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| दोस्त |
पाठकों को समर्पित इस रात्रि को प्रकाश चाहिए। जीवन को जीने की आस चाहिए । अधिक ना भी मिले तो इतना तो सही की दीपक का प्रकाश चाहिए। ज्ञान के सागर में से कुछ ज्यादा नहीं तो थोड़ा सा जीने का अंदाज चाहिए। आपकी चरण कमलों की रज से जीवन में सफलता का विश्वास चाहिए। हमारी भावनाओं को अभिव्यक्त करती हिंदी की कविताऍ, पढ़े ।
रिश्तों की मर्यादा
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प्यार का रंग रंगीला
ना फीका, ना सजीला
हर रिश्ते की होती है अपनी मर्यादा,
हर कोई करता है अपने आप से सच्चा रिश्ता निभाने का वादा।
पर क्या सोचा है, क्यों होती है, हर रिश्ते की मर्यादा ?
खूबसूरत, पवित्र धागे से बंधा होता है, इतना नाजुक होता है कि जरा सी चोट लग जाए तो टूट जाता है प्रेम रूपी धागा।
सदा रिश्तों में मिठास घोले,
अपनों से बड़ों से सदा प्रेम से बोले🙏🏻
झुककर करें सदा प्रणाम
ना हो कभी ऐसा कि बच्चे करें विश्राम और बड़े करें तुम्हारे सभी काम ।।
संग सभी के हँसकर बोलो,
मन-मस्तिष्क में अमृत घोलो।
खुद को भी मिलेगा आराम ।
हर रिश्ते को न तराजू से तोलो ।
बोलने से पहले जरा, सम्भल कर बोलो।
रखो सब का ख्याल,
जी हाँ , रखो सब का ख्याल,
पर जब हो आप का सवाल तो ,
ना मचाए कोई रिश्ता आकर उसमें बवाल..........
सुना है तलवार का जख़्म बहुत गहरा होता है, पर समय के साथ घाव भर जाता है।
जुबान की खट्टास से हर रिश्ता, समय से पहले ही ढ़ल जाता है।
पत्नी जब मायके से आती है।
तब वह पिया संग हर रीत निभाती है , उसकी खातिर अपना पूरा संसार पीछे छोड़ आती है।
वे अपनी हर खुशी, हर ख्वाब की पूर्ति करना ससुराल में ही चाहती है।
क्यों ना ? ब्याहकर बहू नहीं, बेटी ही ले जाई जाए।
रिश्ते की मर्यादा दोनों ही तरफ से निभाई जाए।
रिश्तों में सदा उतार-चढ़ाव आते हैं पर कुछ लोग उस वक्त रिश्ते कटु वचन सुना कर ही निभाते हैं।
कुछ रिश्ते ऊपर से तो अपनापन दिखलाते हैं पर भीतर से साँप से भी अधिक जहर उगल जाते हैं।
बिरादरी के सामने सभी अपने मधुर संबंध दिखलाते हैं , पर मेहमानों के जाते ही सभी रिश्ते अपने -अपने कमरों तक सिमट जाते हैं ।
हम आज आप को इतिहास में ले जाते हैं और बीते समय के लोगों द्वारा निभाई गई रिश्तों की मर्यादा सुनाते हैं।
साथ ही साथ अतीत और वर्तमान के रिश्तों में फर्क भी दिखलाते हैं ।
रिश्ता निभाए भरत जैसा,
जिनके लिए प्रेम से बड़ा नहीं था पैसा।।
आजकल अखबारों में अक्सर ऐसे किस्से आते हैं कि चंद पैसों की खातिर भाई ही भाई का गला दबाते हैं ।
सावित्री ने ऐसा पतिधर्म निभाया कि यमराज ने भी उसकी तपस्या के समक्ष उसका पति लौटाया।
कुछ पति हो या पत्नी अपने स्वार्थ की खातिर एक घर होते हुए भी दूसरा घर बसाते है, अपने परिवार को धोखा देकर नया आशियाना बसाते हैं ।
स्वामी विवेकानंद जी ने ऐसे बेटे की भूमिका निभाई ।
जग को सहनशीलता,परोपकार, प्रेम, दया, भ्रातृत्व प्रेम की सीख हैं पढ़ाई ।
पर आजकल तो माता -पिता या तो अलग घर में जीवन बिताते है या फिर
अनेकों के माता-पिता वृद्धआश्रम में पाए जाते है ।
माँ सती ने पति के अनादर की ऐसी गाथा सुनाई।
खुद भस्म होकर पति के सम्मान की महिमा बढ़ाई।
आजकल तो हर जगह चलती है, हर रिश्ते की बुराई।
क्या कभी सोचा है कि हमारे इन रिश्तों में इतनी दूरी कैसे आई?
क्योंकि हमने सब में गलतियाँ ही पाई ।
ना ढूंढी कभी किसी रिश्ते में अच्छाई।
रिश्तों की मर्यादा हम सब से शुरू होती हैं ।
यदि हम करेंगे भलाई तो लौट कर भी आएगी अच्छाई।
सधन्यवाद
रजनी कपूर
आज ! पापा की याद आई 👀
हमें बचपन में हमेशा सैर पर जाना होता।
असल में यह तो, एक बहाना होता।
कभी आइसक्रीम ,कभी मिठाई, कभी चॉकलेट, कभी खिलौना लाना होता।
पापा भी किसी जन्नत से कम नहीं होते।
माना कि सभी के पापा किसी देश के राजा नहीं होते।
पर उनके कंधे भी किसी पालकी से कम नहीं होते।
गुस्से में पापा यदि किसी बात पर रुलाते हैं, तो घंटों बैठ हमारे संग अपने गुस्से की माफी माँग जाते हैं।
अक्सर पापा समाज के तानों से तंग आकर बेटियों पर लगाम लगाते हैं।
कभी-कभी तुम हो पराई यह भी सुनाते हैं।
कभी अदब, कभी अंदाज, तो कभी स्वाभिमानी बन कैसे जीना है ? यह भी बतलाते हैं।
कभी-कभी अपने दिए संस्कारों को बेटी की जमा पूंजी बतलाते हैं ।
क्या कभी किसी के पापा बेटी के प्रति किसी सैनिक से कम ड्यूटी निभाते हैं?
बेटी पर आंच आए उससे पहले ही दौड़े चले आते हैं।
सबसे मुश्किल घड़ी आई,
जब करनी हो बेटी की विदाई।
पूरी बारात की पापा ने जिम्मेदारी उठाई।
अपनी सारी जमापूंजी भी दांव पर लगाई।
पर जब डोली में बैठी बेटी •••
तो पापा की भी जान पर बन आई।।
न जाने किस मनहूस घड़ी में किसने यह कड़ी बनाई,
आखिर क्यों होती है, बेटियाँ ही सदा पराई ??
क्यों होती है सदा बेटियों की ही विदाई ??
समाज की यह प्रथा अभी तक समझ न आई🌿🌾
पाठकों को समर्पित
इस रात्रि को प्रकाश चाहिए।
जीवन को जीने की आस चाहिए ।
अधिक ना भी मिले तो इतना तो सही की दीपक का प्रकाश चाहिए।
ज्ञान के सागर में से कुछ ज्यादा नहीं तो थोड़ा सा जीने का अंदाज चाहिए।
आपकी चरण कमलों की रज से जीवन में सफलता का विश्वास चाहिए।
शिक्षक दिवस की आपको बहुत-बहुत बधाई
गुरु और शिष्य का संबंध कैसा होता है?
ऑक्सीजन और हाइड्रोजन संग मिले पानी जैसा होता है।
दोनों हो संग तो जमा दे कोई भी रंग,
वरना एक दूसरे के बिना जिंदगी बेरंग।
गुरु डोर है,तो शिष्य पतंग।
उड़ा दे तो अर्श तक,वरना फर्श तक।
खींचे डोर तो शिष्य की सफलता मचा दे शोर!!!
छोड़े तो कहाँ मिले कोई ठौर।
ऑनलाइन पढ़ाई और स्कूल फीस
एक माँ 💁🏼♀️स्कूल प्रांगण में बौखलाई हुई आई।
वह ऑनलाइन फीस के खिलाफ लड़ रही थी लड़ाई।
उसने स्कूल फीस ना भरने की थी कसम खाई।
आते ही स्कूल में टीचर से करने लगी भरपाई ।
बोली करते क्या हो ? किस बात की फीस दें तुम्हें, तुमने क्या खाक पढ़ाई करवाई।
सुन, उसके बाद टीचर मुस्कुराई , 👩🏼
विनम्रता से बोली, पहले करते थे ड्यूटी छोटी अब तो 24 घंटे करते और करवाते हैं पढ़ाई।
हमने भी जूम कक्षा👩🏼💻 लेकर आपके बच्चों को पढ़ाने की हैं कसम खाई।
कभी गणित के फार्मूले में डूबे🧐 बच्चों को हरि सर ने राह दिखलाई।
तो कभी मेडिटेशन🙇🏼♀️ करवाते हुए हिंदी और अंग्रेजी में कहानियाँ सुनवाई।
कभी कविता मेम ने बिना हाथ लगाए बिस्कुट खिलवाया, 🤪तो कभी मुँह में नींबू रखवाया।🤔
छोड़ अपना काम-धाम हमने भी ऑनलाइन पेपर🧑🏻💻 बनाया।
अरे! आप क्या जानो, स्कूल वालों ने ऑनलाइन कक्षा से पहले हमें कितना पढ़ाया ।
कभी व्हाट्सएप, कभी जूम, कभी गूगल फॉर्म भरना हमें सिखलाया ।
साहिल सर ने एक्सपेरिमेंट का बिगुल बजाया, कभी विनेगर कभी एसिडिटी 💧🌊 नपवाकर बच्चों को समझाया।
मैप की आड़ी तिरछी लाइनों में दुबे सर ने बच्चों को क्या खूब घुमाया, कभी लक्ष्यदीप,🌍 कभी मैदान, कभी हिमालय पर्वत से मिलवाया।
प्रियांश सर ने बच्चों को घर के बिस्तर से उठाकर🏃🏼♀️🏃🏻♂️ खूब दौड़वाया।
अभी कहाँ रुके हम, साहिल सर ने भी बच्चों से खूब💃🏾,🕺🏽 डांस करवाया।
हिंदी वाली ने लुका-छिपी खिलवाई । 🧏🏻🧎🏻♀️
कभी चार्ट बनवाए तो कभी कैंसर से जंग भी लड़वाई । 👮🏻♂️👮🏻♀️
जब हमने टैलेंट हंट चलाया तो बच्चों ने भी हमें खूब मनोरंजन🥰 करवाया।
तभी मुझे अपराजिता मेम का ख्याल आया,
वे कहती हैं, सो जाओ जल्दी,
क्या तुमने कभी इस लॉकडाउन में अपना समय अपने परिवार संग भी बिताया?
अपने बच्चों को जूम कक्षा में देख हमारा दिल फूला न समाया😊☺️
फिर भी आप पूछते हो हमने ऑनलाइन कक्षा में क्या पढ़ाया?🤔
धन्यवाद
रजनी कपूर
शिक्षक दिवस( 5 सितंबर 2020)
सूर्य की रोशनी 🌄सत्य का प्रकाश🎇
आज का दिवस मेरे लिए भी है कुछ खास
शिक्षक दिवस की आप सभी को बधाई 🍚
शुक्र है भगवान का कि आज यह शुभ घड़ी आई।
शिक्षक 🧑🏻💻बिन ज्ञान नहीं°°°
ज्ञान बिन, सम्मान नहीं।
शिक्षक और शिक्षार्थी बनना भी आसान नहीं।
धन्य !! वो शिक्षक भी जिसने अच्छा विद्यार्थी पाया।
प्रकृति ने तो कितनों को ही है ,शिक्षक बनाया:-
नदियों 🌊 ने कठिनाइयों में भी रास्ता बनाया।
आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंच कर भी झरनों⛲ ने हमें धरती से जुड़े रहना बतलाया।
चील 🦅ने हमें अच्छे शिक्षक बनने का अभ्यास करवाया।
कोई उस की नजरों से👀 कभी नहीं बच पाया।
सूर्य 🌞ने हमें अनुशासन सिखलाया।
रात्रि ने हमें चाँद 🌝 से मिलवाया।
अज्ञानता के अंधेरे को आसमां ने सितारों से ✨ मिलवाया।
लग्न का पाठ हमें चकोर ने सिखलाया ।
पेड़ों🥦🥦 ने हमें ऊंचे उठना सिखाया।
पहाड़ों 🗻🏔️⛰️ने हमें ऊंचाइयों से मिलवाया ।
इस धरती🛣️ ने सब कुछ सहना सिखलाया ।
इस प्रकृति ने सभी को अच्छा इंसान 🧒🏻बनाया।
गुरु ने भी उच्च शिक्षा 👨🏻🎓🧑🏻🎓देकर बच्चों को अपना फर्ज निभाया।
शिष्य ने भी गुरु दक्षिणा🏆🏆 दे अपना कर्ज चुकाया।
इस प्रकृति🥦🌳 ने सबको देनदार बनाया।
अर्थात - हर मनुष्य अपने जीवन में हर किसी से कुछ न कुछ अवश्य ही सीखता है ।
इस शुभ अवसर पर आप सभी अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई ।🥁🥁
आभार
रजनी कपूर
एटीएस वैली स्कूल की ऑनलाइन पढ़ाई 👩💻🙋♀️
यदि सोच ले हम कदम बढ़ाने को🚶♀️🏃♀️
तो कौन हमें हरा सकता है।
स्कूल नहीं जा सकते तो क्या हुआ,
जज़्बा हो तो ऑनलाइन क्लासेस 👩💻में भी पढ़ा जा सकता है।
होनहार को जरूरत नहीं किसी प्रत्यक्ष प्रमाण की, बिन मिले अपने गुरु को, अपनी कला को भी निखारा जा सकता है।
धन्य है ऐसे शिक्षक जिन्हें गुणवान विद्यार्थी मिले हो।🤗
अवसर तो हमने 2020 से पहले भी आजमाए थे। तरक्की,संघर्ष,सफलता के परचम तो हमने उससे पहले भी कई बार फहराए थे।
परंतु इस त्रासदी से पूर्व हम अपने जीवन में कभी इतने बेबस तो न कहलाए थे।
यह एक मोड़ है,जीवन का !!
जिसने हमें सहना सिखाया ।
बंद कमरों में रहना सिखाया ।
बाह्र्य आडम्बर के बिना जीवन को सार्थक बनाया,
हमें अपने आप से मिलवाया।
हमारे परिवारों को विश्वास,प्रेम, सहानुभूति से मिलवाया।
हमने काफी वर्षों पश्चात स्वयं को घर का सदस्य पाया ।
अब तो ऐसा लगता है कि इसने हमें जीना सिखाया। इसने हमें बताया पहले हम क्या थे ••••••••• ?
हमारी लालसा ने हमें क्या बनाया ?
जब अपने ही कर्म देख 'जी' घबराया •••
तब प्रकृति के परिंदों के हाथ यह पैगाम पहुँचाया।
पहले तुम करते थे मनमर्जी,
अब नहीं चलेगी तुम्हारी अर्जी।
सौ सुनार तो एक लुहार की ••••
अब आई बारी प्रकृति के देनदार की, \
वनपाखी और बेजुबानों की, जिनके घर इमारतों की खातिर उजाड़ दिए।
वन,पर्वत,रेगिस्तान भी सड़कमार्ग बनाने की खातिर बिगाड़ दिए ।
तुमने सड़कों को गाँव से जोड़ा, कितनी बार फ्लाईओवर बनाने की खातिर गरीब ने अपना घर छोड़ा।
रे !! मानव, तुमने इतना कोहराम मचाया फिर भी इन बेजुबानों ने तुमको न ठुकराया,
माना कि हमने बहुत कुछ पाया, परंतु जो खोया उससे मानव को इस धरती पर अपना वजूद समझ आया।
आप सभी को हिंदी🧩 दिवस की बधाई । 📝
14 सितंबर को फिर से है हिंदी की बारी आई।
आज तो रंगमंच पर बड़े ही जोर-शोर से🎤 सभी ने हिन्दी की कविताएँ सुनाई।
श्रोताओं🧏🏻,🧏🏻♂️ ने भी कविता सुन करतल ध्वनि में हैं तालियाँ 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻 बजाई।
अरे! हिन्दी बस आज ही तुझे इतना सम्मान मिलेगा।
फिर तो अंग्रेजी 🔠में ही बच्चों को ज्ञान मिलेगा।
तभी पापा की सुंदर परी 👧🏻 घर आई,आते ही करने लगी अपनी माँ की बुराई,🙆🏼♀️
आज माँ मेरी पीटीएम 🏫पर आई,
ना आती थी अंग्रेजी एक लफ्ज़ भी ना अंग्रेजी का बोल पाई।
पूरी गाथा माँ ने हिंदी 🧩 में ही बोलकर बतलाई।
माँ ने मेरी पूरी कक्षा में हैं नाक कटवाई।
बेटी की यह कहते-कहते आँखें 😭भर आई।
पापा ने उसे पास बिठाकर 👨👧केवल एक ही बात समझाई।
अंग्रेजी बोल कर हमने कर ली बहुत कमाई,💷💶💴💵 इज्जत भी क्या खूब है पाई।
अंग्रेजी ने तो इतने वर्षों से है,भारत में अपनी धाक जमाई।
दूर नहीं जाना है चलो, आज तुम्हें कुछ दिखलाना है।
तभी पापा ने हिन्दी समाचार 🖥️लगाया उसमें हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का हैं भाषण सुनवाया।
फिर बेटी को शिकागो सम्मेलन का वह मंच दिखलाया ।
जहाँ से स्वामी विवेकानंद जी ने हिंदी📜 को था सम्मान दिलवाया।
आज हिंदी ने पूरे विश्व में दूसरा स्थान👌🏻👌🏻 है पाया ।
हिंदी में ही तो अपनत्व की महक आती है।
हिंदी ही तो हमारे संस्कारों की 🙏🏻पहचान करवाती हैं।
क्या अभी भी हिन्दी🧩 को तुमने नहीं अपनाया ?
आज हमने आपको पूरी कविता में हिंदी का📖 इतिहास सुनाया।
बेटी ने भी जा हँसकर माँ 👭🏻 को गले लगाया।
सधन्यवाद
रजनी कपूर
बचपन में भाई-बहन का रिश्ता
नादान, बचपन की शान,माता पिता की जान।
स्कूल हो या पड़ोस भाई बहन होते हैं एक दूजे की पहचान ।
रूठना, मनाना, बड़ी से बड़ी बात पर भी एक दूजे की आँखों में आँसू देखते ही झट से मान जाना।
कभी एक-साथ सैर पर जाना । कभी एक-साथ भोजन खाना।
खुद पर इतराना,एक दूजे को चिढ़ाना ।
एक का दूसरे को मर झट से भाग जाना।
उसका पीछे से जोरों से आवाज लगाना, चप्पल उठा उसे मारने दौड़ जाना ।
कभी एक दूसरे की गलतियों को छिपाना।
एक दूसरे की चीजों पर हक जमाना
तो कभी एक-दूजे के लिए अपना हक भी छोड़ आना।
इस रिश्ते में चाह कर भी कभी किसी दूरी का न आ पाना ।।
भाई-बहन का रिश्ता उनकी शादी के बाद
बहन का ससुराल से जब मायके आना, सबसे पहले अपना दर्द अपने भाई से छिपाना ।
उसको छोटा समझ उससे अपनी बात को न बतलाना।
घर में भाभी का आना भाई का उस संग समय बिताना ।
भाई का बहन को कम समय दे पाना, उस संग सैर पर न जाना, उस पर अब पहले सा हक न जमाना ।
आरम्भ हो गया दोनों के रिश्ते में एक छोटी सी दूरी का आना।
बेटी का जवाई को मायके लाना, सभी को पसंद आया उसे घर का ही सदस्य बतलाना ।
भाभी का अपने मायके जाना, भाई का उसे छोड़ कर आना और फिर उसे लेने भी जाना ।
बहन को यह सब पसंद न आना।
आरम्भ हो गया दोनों के रिश्ते में एक छोटी सी दूरी का आना।
बहन का अपने पति और भाभी संग अपने भाई के व्यवहार का नापतोल लगाना।
आरम्भ हो गया दोनों के रिश्ते में एक छोटी सी दूरी का आना।
अब बहन का भाई पर रौब न जमाना।
बात-बात पर रूठ जाना, कभी इस बहाने, कभी उस बहाने, एक -दूसरे की शिकायतें लगाना ।
आरम्भ हो गया दोनों के रिश्ते में एक छोटी सी दूरी का आना।
मैं जानना चाहती हूँ क्यों बंद हो जाए भाई या बहन का एक दूसरे पर हक जमाना ???
मेरे हिसाब से रिश्तो में सबसे पहले भाई-बहन का रिश्ता चाहिए है निभाना।
उस रिश्ते में भाभी हो या जवाई दोनों का निषेध हो आना ।
चिरस्थायी रहे !! वह रिश्ता जो मां-बाप के साए में पला था ।
उस प्यार का सदा एक सा रह पाना।
मेरी अपील है सभी भाइयों और बहनों से कि कहे ••••••
भाई ! तुम सदा वही बचपन वाला रिश्ता ही निभाना ।।
बहन ! तुम भूल मत जाना भाई पर अपना हक
जमाना ।।
धन्यवाद
रजनी कपूर
विनायकी (kerala)
सोचा बहुत बार लिखूं या जाने दूं।
बेजुबान ही तो है, पता नहीं हर रोज कितने ही मरते हैं।
वैसे मैं कोई कवयित्री नहीं, पर दिल के तले से आवाज आई माँ 🤱तो है किसी की!
क्या उस माँ 🐘 पर तेरी ममता नहीं पिघलाई , बस मैंने रात यह सोचकर बिताई, क्या! इसे ही कहते हैं कलयुग संत,गोसाई
दुखद अंत 🐘🥀🥀🥀🥀🥀🥀
दुनिया में इस वक्त कहर की कमी नहीं •••••••
लाशों के ढेर पर अब कहीं नमी नहीं •••
एक मुसीबत हटती नहीं, दूसरी आ जाती है;कभी कोरोना, कहीं तूफान इस सब ने पूरी दुनिया में हैं आफत मचाई ।
रे! इंसान तुझे अभी भी क्यों ना समझ आई।
तूने क्यों केरल के पलक्कड़ में अपनी हैवानियत दिखाइए। आज पूरे विश्व में 🐘विनायकी का दर्द सभी की आँखों में आँसू बन बह रहा।
उसका गर्भ में पल रहा शिशु इंसान से कह रहा••• क्या कसूर था, मेरी मां का
जो भूखे को अन्न 🍍🥥🍌की जगह अंगार💥💥 खिलाया।
क्या कसूर था, मेरा जो इतने महीनों गर्भ में पलने पर भी मैं बाहर ना आया•••••
तड़पती, बिलखती और कराहती रही मेरी माँ ••••🐘• खुद को और मुझे जिंदा रखने के लिए अकुलाती रही माँ•••🐘
कभी पत्थरों पर,कभी पानी में, कभी दर्द भरी चीखों से, कभी खामोशी से ••••○○
मासूमियत भरी आँखों से👀 इस कायनात को ताकती रही। और सोचती रही•••
रे! दानव तू क्या जाने पीर पराई•••
ऐ खुदा! देख ली तेरी भी खुदाई,क्यों तुने इतनी देर लगाई।
आभार
रजनी कपूर
जिसको मैंने जीवनपथ का गुरु मान, आधार बनाया। जिसकी शिक्षा और मार्गदर्शन ने था; नया रास्ता दिखलाया। जिसकी लग्न व ईमानदारी को था; मैंन...