परमात्मा से अरदास
यह तन भी तेरा,यह मन भी तेरा
यह सृष्टि,प्रकृति,नदियाँ,सूरज
चाँद,तारे,तमस सभी कुछ तेरा।।
जीवन भी तेरा,मरण भी तेरा
तेरे होते हे परमात्मा !
क्यों हैं ??
इस विश्व में हैं सघन अन्धेरा,
विश्वास,करुणा,ममता,दया
परोपकार,उदारता,विशालता
सभी तेरे लक्षण,
ये सभी मनुष्य के मार्गदर्शक।
ये वर्षा,ये उमस,ये सर्दी,कंपकपाहट, गर्मी
की गर्माहट, ये उमंग,ये उल्लास भी तेरा
तो भगवन ! फिर भी क्यों
छाया है इस धरती पर
घोर अन्धेरा,
मुक्त कर लोगों को इस रजनी से
ज्योति जगा दे आस की
क्योंकि मनुष्य की आत्मा में निवास भी तेरा
छुड़ा दे इस आत्मा को भयंकर कहर से
क्योंकि सुख भी तेरा, दुख भी !!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
यदि आपको कविताएँ अच्छी लगी तो कृप्या इनको लाइक करें । कविता पढ़ने के लिए आपका आभार