रविवार, 24 जनवरी 2021

                           प्यार का बँटवारा





  मैंने प्यार को बँटते देखा है।

 स्वयं को किसी दूसरे की नजरों में छटते देखा है।


 अपनी शरात का लुफ़्त उठते देखा है।

हमें अपना प्यार दिखा कर••

 किसी ओर की तरफ रुख करते देखा है।

 शिकवा उससे नहीं है,क्योंकि पता है वह तो बेवफ़ा ही था शुरु से !! 

 मैंने स्वयं को उसकी नजरों से धुएँ के बदल की तरह छटते देखा है।

 अब तो लगता है कि हमारा उनके पास से जाना भी उनकी नजरों में खटकता हैं ।

 परेशा तो हूँ !! अपनी गलती की वजह से•• 

 पर !! तसल्ली भी है।

मैंने खुद को खुद से ही संभलते देखा है।

भूल पाना तो मुमकिन नहीं है शायद••

पर उसके गम को ...........

अपने हाथों से कागज पर संभलते देखा है। 

 

आभार

रजनी कपूर


कागज पर संभलते देखना का अर्थ -कविता बनाकर लिखना 


गणतंत्र दिवस की बधाई ।। ( 2021)

                               गणतंत्र दिवस की बधाई ।।





 

कहा  जाता है," हम सब एक हैं"। 

कहा  जाता है," हम सब एक हैं"। 

फिर उस खुदा तक जाने के क्यों रास्ते अनेक हैं  ????

क्यों मंदिर ,क्यों मस्जिद, क्यों गिरजा, क्यों गुरुद्वारा

यदि  सभी धर्मों  का मकसद एक  हैं .........

यदि!  हम सब एक है तो सरहदे क्यों अनेक है  ??

क्यों! कोरोना  ने हम सब को डराया ?

 क्यों! हम मनुष्यों का धर्म उससे समझ में नहीं  आया ??

क्यों! उसने भी  देश के राजनेताओं की तरह किसी एक पक्ष को अपना  गुलाम नहीं बनाया।

 कोरोना ने हम सब को "एक लकड़ी से हाँका "।

 कोरोना ने हम सब को "एक लकड़ी से हाँका "। 


 धर्म की दीवारें खड़ी करने वाले भी

धर्म की दीवारें खड़ी करने वाले भी

उसका कर न सके" एक बाल भी बाँका"। 

कब तक होती रहेगी...............

                                      देश की सरहदों से सिपाहियों की विदाई  ??

कब तक सूनी होती रहेगी..............

                                         किसी सुहागन की कलाई ??

गुरुपूरब, होली, ईद, क्रिसमस मनाकर भी................

                                      यह  यह बात  किसी को समझ में नहीं आई।

                   क्यों होती है जंगे ??

               क्यों झुकाए जाते हैं तिरंगे ??

इंसान को इंसानियत में क्यों दिखती नहीं दिखती  सब  की भलाई ।।


चलो जाने दो,

 इस स्वतंत्र भारत में आप सभी को गणतंत्र दिवस की बधाई ।।




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सोमवार, 9 नवंबर 2020

दर्द-ए-दिल

                                              दर्द-ए-दिल

बतलाना तो चाहा परंतु आपको दर्द -ए -दिल कभी बतलाया नहीं।

 जताना तो चाहा परंतु कभी आपने एहसास से आपको रूबरू करवाया नहीं।

जिंदगी में हलचल सी मच गई थी स्पर्श से, आपके

 पर कभी आप पर हक  जतलाया नहीं।

जरा सी बातों से नाराज हो जाते हो।

किसी के बहकावे में आकर जरा सा कुछ बोलूं तो सहन नहीं कर पाते हो।

 गुस्सा हो मुझसे यह तो मुझे जतलाते हो,

 पर अपनी प्रेम भावना को  बहुत कम ही बतलाते हो।

जरा सा मौका मिले तो मुझे चिढ़ाते हो, कभी किसी से, तो फिर किसी ओर से, हंसकर बातें करते हो ।

मुझे देखकर इग्नोर मार जाते हो।

आपको  भुलाने की नाकाम कोशिश जारी है।

फिर क्या करूं इस दिल  का , जिसने करनी आपकी  ही पहरेदारी है।

ना जाने कितनी बार रोई हूँ।

कितनी बार बिस्तर पर लेटी  तो हूँ ,पर रातभर नहीं सोई हूँ।

आपसे विनती है मेरी यह बता दीजिए मैं आपके काबिल हूँ या अभी तक भ्रम में ही खोई हूँ।

धन्यवाद

रजनी कपूर

शनिवार, 24 अक्टूबर 2020

दोस्ती

                                  दोस्ती


दोस्त

प्यार का रंग रंगीला ना फीका, ना सजीला (रिश्तों की मर्यादा )

                                                            
                          रिश्तों की मर्यादा


                       



    प्यार का रंग रंगीला 

        ना  फीका, ना सजीला 


हर रिश्ते की होती है अपनी मर्यादा,

 हर कोई करता है अपने आप से सच्चा रिश्ता निभाने का वादा।

 पर क्या सोचा है, क्यों  होती है, हर रिश्ते की मर्यादा ?

खूबसूरत, पवित्र धागे से बंधा होता है, इतना नाजुक होता है कि जरा सी चोट लग जाए तो टूट जाता है प्रेम रूपी धागा।

सदा रिश्तों में मिठास घोले,

अपनों से बड़ों से सदा प्रेम से बोले🙏🏻

झुककर करें  सदा प्रणाम

 ना हो कभी ऐसा कि बच्चे करें विश्राम और बड़े करें  तुम्हारे सभी काम ।।


संग सभी के हँसकर बोलो,

मन-मस्तिष्क में अमृत घोलो।

खुद को भी मिलेगा आराम ।

 हर रिश्ते को न तराजू से  तोलो ।

 बोलने से पहले जरा, सम्भल कर बोलो।


रखो सब का ख्याल, 

जी हाँ , रखो सब का ख्याल,

 पर जब हो आप का सवाल तो ,

ना मचाए  कोई रिश्ता  आकर उसमें  बवाल..........


सुना है तलवार का जख़्म बहुत गहरा होता  है, पर समय के साथ घाव भर जाता है।

जुबान की खट्टास से हर रिश्ता, समय से पहले ही  ढ़ल जाता है।


पत्नी जब मायके से आती है।

 तब वह पिया संग हर रीत निभाती  है , उसकी खातिर अपना पूरा संसार पीछे छोड़ आती है।

वे अपनी हर खुशी, हर ख्वाब की पूर्ति करना ससुराल में ही चाहती है।

 

क्यों ना ? ब्याहकर बहू नहीं,  बेटी ही ले जाई  जाए।

 रिश्ते की मर्यादा दोनों ही तरफ से निभाई जाए।


 रिश्तों  में सदा उतार-चढ़ाव आते हैं पर  कुछ लोग उस वक्त  रिश्ते कटु वचन सुना कर ही निभाते हैं।

कुछ रिश्ते ऊपर से तो अपनापन  दिखलाते  हैं पर  भीतर से साँप से भी अधिक जहर उगल जाते हैं।

बिरादरी के सामने सभी अपने मधुर संबंध दिखलाते हैं , पर मेहमानों  के जाते ही सभी रिश्ते अपने -अपने कमरों तक  सिमट जाते हैं । 



हम आज आप को इतिहास में ले जाते हैं और बीते समय के लोगों द्वारा निभाई गई रिश्तों की मर्यादा सुनाते हैं।

साथ ही साथ अतीत और वर्तमान के रिश्तों में  फर्क भी दिखलाते  हैं ।


 रिश्ता निभाए भरत जैसा,

जिनके लिए प्रेम से बड़ा नहीं था पैसा।।

 आजकल अखबारों  में अक्सर ऐसे किस्से आते हैं  कि चंद पैसों की खातिर भाई ही भाई का गला दबाते हैं ।

सावित्री ने  ऐसा पतिधर्म निभाया कि यमराज ने भी उसकी तपस्या के समक्ष उसका पति लौटाया।

कुछ पति हो या  पत्नी अपने स्वार्थ की खातिर एक घर होते हुए भी दूसरा घर बसाते है,  अपने परिवार को धोखा देकर नया आशियाना बसाते हैं ।


 स्वामी विवेकानंद जी ने ऐसे बेटे की भूमिका  निभाई ।

जग को सहनशीलता,परोपकार, प्रेम, दया, भ्रातृत्‍व  प्रेम की सीख हैं  पढ़ाई ।

पर आजकल तो  माता -पिता  या तो अलग घर में जीवन बिताते है या फिर

अनेकों के माता-पिता वृद्धआश्रम में पाए जाते है ।  

 माँ सती ने पति के अनादर की ऐसी गाथा सुनाई।

 खुद भस्म  होकर पति  के सम्मान की महिमा बढ़ाई।

आजकल तो हर जगह  चलती है, हर रिश्ते की बुराई।



क्या कभी सोचा है कि हमारे  इन  रिश्तों  में इतनी दूरी कैसे  आई?

क्योंकि हमने सब में गलतियाँ  ही पाई ।

ना ढूंढी कभी किसी रिश्ते में अच्छाई।

रिश्तों  की मर्यादा हम सब से शुरू होती हैं ।

यदि हम करेंगे भलाई तो लौट कर भी आएगी अच्छाई।

सधन्यवाद 

रजनी कपूर

समझदारी से मिला धोखा

   जिसको मैंने जीवनपथ का गुरु     मान,  आधार बनाया। जिसकी शिक्षा और मार्गदर्शन ने था; नया रास्ता दिखलाया। जिसकी  लग्न व ईमानदारी को था; मैंन...